सिसोदिया राजवंश
सिसोदिया राजवंश की स्थापना सन 556 ईस्वी में गुहिल ने की थी। गुहिल के नाम पर ही इस वंश का नाम गुहिल वंश और फिर बाद में गहलोत वंश पड़ा जोकि बाद में सिसोदिया वंश के नाम से जाना गया। यद्यपि सिसोदिया राजवंश की स्थापना गुहिल के द्वारा सन 556 में हो गयी थी परन्तु इसका वास्तविक संस्थापक बप्पा रावल को मन जाता है। बाप्पा रावल ने सन 734 में चित्तौड़ के दुर्ग पर अधिकार करके गुहिल की वास्तविक स्थापना की।
इस राजवंश में कई शूरवीर एवं प्रतापी राजा हुए जिनमे बप्पा रावल , महाराणा हम्मीर सिंह , महाराणा कुम्भा , महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा), महाराणा प्रताप प्रमुख हैं जो मेवाड़ के इतिहास में और भारत के इतिहास में त्याग बलिदान और वीरता के लिए प्रसिद्ध हुए।
मान्यता यह है की सिसोदिया वंश भगवान राम के वंशज हैं। भागवान राम के द्वारा लव को उत्तर पश्चिम क्षेत्र मिला था जिसकी राजधानी वर्तमान लाहौर है। कालांतर में इस वंश का विस्तार हुआ और ये उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत के कई हिस्सों में फ़ैल गए। इन्ही वंश में भगवान राम के 285 वीं पीढ़ी में गुहिल हुए जिन्होंने गुहिल वंश की स्थापना की जो की आज सिसोदिया वंश के नाम से जाना जाता है।
गुहिल वंश इतिहास का सबसे प्राचीनतम वंश माना जाता है। इसके शाशक सूर्यवंशी राजपूत कहलाये। इनका उद्द्भव स्थल सौराष्ट्र रहा बाद में सत्ता विस्थापन के बाद ये इदर स्थापित हुए और इदर से इनके सत्ता का विस्थापन मेवाड़ हुआ।
यद्यपि सिसोदिया राजवंश की स्थापना गुहिल के द्वारा सन 556 में हो गयी थी परन्तु इसका वास्तविक रूप से बप्पा रावल ने सन 734 में चित्तौड़ के दुर्ग पर अधिकार करके इसकी स्थापना की।
आगे हम 734 से अब तक के शाशक और उनके शाशनकाल का विवरण दे रहे हैं।
सिसोदिया वंश के शासक और उनका शासनकाल सन 734 से अब तक
| शासक | शासनकाल |
| बप्पा रावल | 734 – 753 ई. |
| रावल खुमान | 753 – 773 ई. |
| मत्तट | 773 – 793 ई. |
| भर्तभट्त | 793 – 813 ई. |
| रावल सिंह | 813 – 828 ई. |
| खुमाण सिंह | 828 – 853 ई. |
| महायक | 853 – 878 ई. |
| खुमाण तृतीय | 878 – 903 ई. |
| भर्तभट्ट द्वितीय | 903 – 951 ई. |
| अल्लट | 951 – 971 ई. |
| नरवाहन | 971 – 973 ई. |
| शालिवाहन | 973 – 977 ई. |
| शक्ति कुमार | 977 – 993 ई. |
| अम्बा प्रसाद | 993 – 1007 ई. |
| शुची वरमा | 1007- 1021 ई. |
| नर वर्मा | 1021 – 1035 ई. |
| कीर्ति वर्मा | 1035 – 1051 ई. |
| योगराज | 1051 – 1068 ई. |
| वैरठ | 1068 – 1088 ई. |
| हंस पाल | 1088 – 1103 ई. |
| वैरी सिंह | 1103 – 1107 ई. |
| विजय सिंह | 1107 – 1127 ई. |
| अरि सिंह | 1127 – 1138 ई. |
| चौड सिंह | 1138 – 1148 ई. |
| विक्रम सिंह | 1148 – 1158 ई. |
| रण सिंह (कर्ण सिंह) | 1158 – 1168 ई. |
| क्षेम सिंह | 1168 – 1172 ई. |
| सामंत सिंह | 1172 – 1179 ई. |
| रतन सिंह | 1301-1303 ई. |
| राजा अजय सिंह | 1303 – 1326 ई. |
| महाराणा हमीर सिंह | 1326 – 1364 ई. |
| महाराणा क्षेत्र सिंह | 1364 – 1382 ई. |
| महाराणा लाखासिंह | 1382 – 1421 ई. |
| महाराणा मोकल | 1421 – 1433 ई. |
| महाराणा कुम्भा | 1433 – 1469 ई. |
| महाराणा उदा सिंह | 1468 – 1473 ई. |
| महाराणा रायमल | 1473 – 1509 ई. |
| महाराणा सांगा (संग्राम सिंह) | 1509 – 1527 ई. |
| महाराणा रतन सिंह | 1528 – 1531 ई. |
| महाराणा विक्रमादित्य | 1531 – 1534 ई. |
| महाराणा उदय सिंह | 1537 – 1572 ई. |
| महाराणा प्रताप | 1572 -1597 ई. |
| महाराणा अमर सिंह | 1597 – 1620 ई. |
| महाराणा कर्ण सिंह | 1620 – 1628 ई. |
| महाराणा जगत सिंह | 1628 – 1652 ई. |
| महाराणा राज सिंह | 1652 – 1680 ई. |
| महाराणा अमर सिंह II | 1698 – 1710 ई. |
| महाराणा संग्राम सिंह | 1710 – 1734 ई. |
| महाराणा जगत सिंह II | 1734 – 1751 ई. |
| महाराणा प्रताप सिंह II | 1751 – 1754 ई. |
| महाराणा राजसिंह II | 1754 – 1761 ई. |
| महाराणा हमीर सिंह II | 1773 – 1778 ई. |
| महाराणा भीमसिंह | 1778 – 1828 ई. |
| महाराणा जवान सिंह | 1828 – 1838 ई. |
| महाराणा सरदार सिंह | 1838 – 1842 ई. |
| महाराणा स्वरूप सिंह | 1842 – 1861 ई. |
| महाराणा शंभू सिंह | 1861 – 1874 ई. |
| महाराणा सज्जन सिंह | 1874 – 1884 ई. |
| महाराणा फ़तेह सिंह | 1883 – 1930 ई. |
| महाराणा भूपाल सिंह | 1930 – 1955 ई. |
| महाराणा भगवत सिंह | 1955 – 1984 ई. |
| महाराणा महेन्द्र सिंह | 1984 ई. |