२४ घंटे में ४ युग

२४ घंटे में ४ युग

जैसा हम जानते हैं कि शास्त्रों में ४ युगों का वर्णन है।

सतयुग

त्रेता

द्वापर

कलयुग

 

आज हम आपको बताते हैं कि  आज भी हम ये सारे युगों को अपने रोजमर्रा कि जिंदगी में जीते हैं।

 

आईये जानते हैं कैसे :-

 

सतयुग

 

सतयुग सत्य  और धर्म का प्रतीक है

उदाहरण , सतयुग का आरम्भ बर्ह्म मुहूर्त से होता है और यह सुबह के ९ बजे तक रहता है।  इस अवधी में मनुष्य का मन सात्विक  होता है और पूजा पाठ और अन्य  धर्माचरण करता है। अतः इस अवधि में मनुष्य सतयुग में जी रहा होता है ।

 

त्रेता

 

त्रेता त्याग का प्रतीक होता है इसे श्री राम के युग से जोड़ा जाता है।

उदहारण, त्रेता का आरम्भ सुबह के ९ बजे से होता है और यह शाम के 6 बजे तक रहता है। जिस प्रकार से श्री राम जी ने घर और राजपाट के सुख का त्याग करके वन को गए थे उसी प्रकार मनुष्य व्यवसाय और शिक्षा के लिए दिन में घर और परिवार का त्याग करता है। अतः इस अवधि में मनुष्य त्रेता युग में जी रहा होता है।

 

द्वापर

 

द्वापर युग प्रेम का प्रतीक है इसके श्री कृष्ण से जोड़ा जाता है, श्री कृष्ण जी प्रेम के प्रतीक हैं। 

उदाहरण , इस युग का आरम्भ शाम के ६ बजे से होता है और रात में सोने तक रहता है।  शाम को मनुष्य शिक्षा और व्यवसाय से घर वापस आता है और अपने परिवार के साथ प्रेम पूर्वक समय बीतता है। अतः इस अवधि में मनुष्य द्वापर युग में जी रहा होता है।

 

कलयुग

 

कलयुग झूठ, पाप और अंधकार का प्रतीक है। 

उदाहरण, इस युग का आरम्भ रात को १० बजे से होता है और यह ब्रम्ह मुहूर्त तक रहता है , इस अवधि में मनुष्य मदिरापान , ब्यभिचार, चोरी, हत्या इत्यादि राक्षसीय और बुरे कर्म करता है, अतः इस अवधि में मनुष्य कलयुग में जी रहा होता है।

 

इस प्रकार से आज का मनुष्य २४ घंटे में ही ४ युगों को जी लेता है।

 

ये मेरे स्वयं के विचार हैं।  सहमत हों तो शेयर करें।

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